इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT क्या है और कैसे काम करती है? - Pk hindi tech :- Technologies se related jaankari hindi me

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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT क्या है और कैसे काम करती है?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT क्या है और कैसे काम करती है?

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EVM क्या है? (What is EVM in Hindi ) आप ने ईवीएम मशीन और VVPAT के बारे में जरूर सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं की ईवीएम मशीन क्या है और यह कैसे काम करती है? अगर आप नहीं जानते हैं तो इस आर्टिकल में आपको Electronic Voting Machine और VVPAT की पूरी जानकारी मिल जाएगी। हम यहां पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ( EVM machine ) और VVPAT के बारे में ही बता करने वाले है। What is EVM and How it Work in Hindi
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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीने (EVM) क्या है ?

EVM की Full Form है Electronic Voting Machine, यह एक ऐसी मशीन है जिसका इस्तेमाल भारत में मतदान (Vote) देने के लिए किया जाता है।

भारत में EVM का उपयोग आम चुनावों (Parliamentary Election) और राज्य चुनाव (State Election) में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को बढ़ावा देने हेतु 1999 से किया जा रहा है। पहले चुनाव Ballot Paper से हुआ करते थे, लेकिन अब पूरे भारत में बैलेट पेपर की जगह ईवीएम मशीन ने ले ली है।



EVM Machine की Security को लेकर कई Political Parties ने सवाल खड़े किए हैं। जिसके  वजह से Election Comission ने VVPAT ( voter-varified paper audit trial ) सिस्टम को इंट्रोडूस किया। 


EVM में 2 Units होते हैं, एक Control Unit और दूसरा Balloting Unit यह दोनों Units एक दूसरे के साथ five-meter cable से जुड़ी हुई रहती है।Control Unit का इस्तेमाल मतदान अधिकारी करता है जबकि बैलटिंग यूनिट का इस्तेमाल मतदाता (Voter) करता है। जब तक मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट का बटन press नहीं करेगा, तब तक वोटर वोट नहीं डाल सकता। EVM से vote डालने के बाद, मशीन अपने आप लॉक (lock) हो जाती हैं। उसके बाद मतदान अधिकारी के कंट्रोल यूनिट बटन दबाने के बाद ही दूसरा वयक्ति मतदान कर सकता है। ( ऐसा इसलिए है ताकि एक वयक्ति सिर्फ एक बार ही वोट कर सके).

VVPAT क्या है ? 



वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट (VVPAT) व्यवस्था के तहत वोट डालने के तुरंत बाद काग़ज़ की एक पर्ची बनती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है। ईवीएम में लगे शीशे के एक स्क्रीन पर यह पर्ची सात सेकंड तक दिखती है। यह व्यवस्था इसलिए है कि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके। 
सबसे पहले इसका इस्तेमाल नागालैंड के चुनाव में 2013 में हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट (VVPAT) मशीन बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के आदेश केंद्र सरकार को दिया। 


Election Commission (चुनाव आयोग) ने जून 2014 में यह तय किया की अगले चुनाव यानी साल 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा.

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के फायदे 

वैसे तोह ईवीएम मशीन के बहुत सारे फायदे है लेकिन मैंने कुछ फायदों के बारे मे ही निचे लिखा है. 
  • EVM Votes Counting बहुत आसान और तेज होती है।
  • बैलट पेपर के उत्पादन और छपाई में होने वाले करोड़ों रुपए के खर्च को कम किया जा सकता है।
  • EVM में बैटरी का इस्तेमाल होता है इसलिए इसका इस्तेमाल कहीं पर भी किया जा सकता है।
  • इसके इस्तेमाल से बहुत से पेड़ों को काटने से रोका जा सकता है जिनका इस्तेमाल Ballot Paper बनाने के लिए होता था।
  • अनपढ़ लोगों के लिए EVM बैलेट पेपर से कहीं ज्यादा बेहतर है।
  • यह बहुत हल्का होता है जिसकी वजह से इसे एक जगह से दूसरे जगह ले जाना बहुत आसान हो जाता है।


इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इतिहास 



एक इंजीनियर के रूप में, श्री रंगराजन (उर्फ) लेखक सुजाथा रंगराजन ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में अपने कार्यकाल के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के डिजाइन और उत्पादन की देखरेख की, एक मशीन जो वर्तमान में भारत में चुनावों में उपयोग की जाती है, इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित वोट गिनती की मशीन ”। छह शहरों में आयोजित सरकारी प्रदर्शनियों में उनका मूल डिजाइन जनता के लिए प्रदर्शित किया गया था। ईवीएम को 1989 में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सहयोग से भारत के चुनाव आयोग द्वारा कमीशन किया गया था। EVM के औद्योगिक डिजाइनर औद्योगिक डिजाइन केंद्र, IIT बॉम्बे में संकाय सदस्य थे। ईवीएम का उपयोग 1982 में केरल में उत्तर परवूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में उप चुनावों में सीमित संख्या में मतदान केंद्रों के लिए किया गया था। 

 ईवीएम का पहली बार प्रयोग राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली के चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में प्रायोगिक आधार पर किया गया था। । 1999 में गोवा के विधानसभा के लिए आम चुनाव (पूरे राज्य) में पहली बार ईवीएम का उपयोग किया गया था। 2003 में, सभी उप-चुनाव और राज्य चुनाव ईवीएम का उपयोग करके आयोजित किए गए थे। 

तोह आज हमने ईवीएम क्या है, ईवीएम काम कैसे करता है, ईवीएम मशीन के फायदे, ईवीएम में कितने यूनिट होते हैं और वीवीपैट के बारे में जाना।उम्मीद है आपको हमारी “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन” वाली यह पोस्ट पसंद आई होगी और आपको इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की पूरी जानकारी मिल गई होगी।


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