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1G, 2G, 3G, 4G और 5G में क्या अंतर है?

1G, 2G, 3G, 4G और 5G में क्या अंतर है?

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जब आप इंटरनेट से जुड़े होते हैं, तो आपके इंटरनेट की स्पीड सिग्नल पर निर्भर करती है जो कि आपके होम स्क्रीन पर सिग्नल बार के ठीक बगल में 2G, 3G, 4G आदि जैसे अल्फाबेट्स में दिखाई देती है। इन G के बीच आम अंतर डेटा की स्पीड में है जो की निस्संदेह 1G से 5G तक बढ़ता जाता है।  "G" का अर्थ "Generation" होता है। यह विकास यात्रा 1979 में 1G से शुरू की गई थी और यह अभी भी 5G तक जारी है।

  • 1G - 2.4 Kb/s  तक की स्पीड प्रदान करता है। 
  • 2G (GSM) - 64 Kb/s तक की स्पीड प्रदान करता है। 
  • 3G - 144 Kb/s से 2 Mb/s तक की स्पीड प्रदान करता है। 
  • 4G (LTE) - 100 Mb/s से 1 Gb/s तक की स्पीड प्रदान करता है।
  • 5G - 10 Gb/s तक की स्पीड प्रदान कर सकता है। 


अब मैं यहाँ बढ़ते क्रम (1G से 5G तक) मे प्रत्येक पीढ़ी (G or Generation) के बारे में  आपको बताऊंगा। 



1G

व्यावसायिक रूप से  "1G1979 में NTT द्वारा जापान में लॉन्च किया गया था। पांच वर्षों के भीतर, NTT नेटवर्क का विस्तार जापान की पूरी आबादी को कवर करने के लिए किया गया था और फिर यह सभी देशो का पहला नेटवर्क बन गया। यह पूरी तरह से एनालॉग तकनीक थी। यहाँ सिर्फ वौइस् की सुभीधा थी। (2G के आने के बाद इस नेटवर्क को 1G कहा जाने लगा।)

2G (GSM)

1991 में "2G" नेटवर्क को रेडिओलिंजा (एक Mobile operator companyद्वारा फिनलैंड में व्यावसायिक रूप से लॉन्च किया गया था। यहाँ डिजिटल मॉड्यूलेशन पहली बार पेश किया गया था।  2G पर भेजे गए सभी संदेश डिजिटल रूप से एन्क्रिप्ट किए गए हैं, जिससे डेटा को इस तरह एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर किया जा सकता है कि केवल इच्छित रिसीवर ही इसे प्राप्त कर सके और पढ़ सके।



1G और 2G के बीच मुख्य अंतर यह है कि 1G नेटवर्क द्वारा उपयोग किये जाने वाले रेडियो सिग्नल एनालॉग हैं, जबकि 2G नेटवर्क डिजिटल हैं।

2.5G (GPRS)

कुछ समय बाद 2.5G तस्वीर में आ गई जो 2G के मुकाबले बेहतर डेटा स्पीड (64-144 kbps) देने लगी। 

2.75G (EDGE)

EDGE को GSM परिवार के हिस्से के रूप में 3GPP (3rd Generation Partnership Project) द्वारा  स्टैंडडराइज़ किया गया है। जो की 2G और 2.5G से बेहतर डेटा दर प्रदान करता है।इसकी GSM / GPRS की तुलना में तीन गुना क्षमता है। 



3G 

यह तेज इंटरनेट स्पीड के लिए 2G और 2.5G नेटवर्क का अपग्रेड है। 3G का पहला ट्रायल 1 अक्टूबर 2001 को जापान में NTT Docomo द्वारा किया गया था, हालाँकि यह शुरू में कुछ हद तक सीमित था। एशिया में पहली बार 3G सेवा नेपाल दूरसंचार (Nepal Telecom) द्वारा अपनाया गया था। यह ऑडियो को संपीड़ित करके स्पेक्ट्रम की दक्षता में वृद्धि करता है।यह स्थिर या कम गतिशीलता उपयोगकर्ताओं के लिए 2 Mbps की स्पीड और मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए 384 kbps तक का समर्थन करता है। 

बाद में 3.5G और 3.75G भी तस्वीर में आई जो लैपटॉप, कंप्यूटर, स्मार्टफोन और मोबाइल मॉडेम को कई Mbps के मोबाइल ब्रॉडबैंड एक्सेस भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि इसे वायरलेस वॉइस टेलीफोन, मोबाइल इंटरनेट एक्सेस, वीडियो कॉल और मोबाइल टीवी टेक्नोलॉजी पर लागू किया जा सकता है।



4G 

4 जी ब्रॉडबैंड सेलुलर नेटवर्क टेक्नोलॉजी की चौथी पीढ़ी है। यह 2000 में तस्वीर में आया लेकिन 2010 में तैनात किया गया। LTE (व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला) और Wimax दो टेक्नोलॉजीज हैं जो 1800 मेगाहर्ट्ज, 2600 मेगाहर्ट्ज और 800 मेगाहर्ट्ज बैंड पर काम करता है। 4G ने पूरे नेटवर्क पैकेट को इंटरनेट की तरह पेश किया। यह 3G की तरह पैकेट स्विचिंग का उपयोग करता है, लेकिन इसके अतिरिक्त संदेश स्विचिंग भी है जो इसे और अधिक लाभकारी बनाता है। यह बिना मोबाइल वाले उपयोगकर्ताओं के लिए 1 Gbps  तक का डेटा दर और मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए 100 Mbps तक का समर्थन करता है। 

5G 



5G सेलुलर मोबाइल नेटवर्क की सबसे लेटेस्ट पीढ़ी है। यह 2020 तक अमेरिका और यूरोप में लाया जाएगा (भारत में 2025 तक उम्मीद है)। 5G का पहला चरण अप्रैल 2019 तक पूरा किया जाएगा और दूसरा चरण अप्रैल 2020 तक पूरा होने वाला है। 
5G का लक्ष्य  उच्च डेटा प्राइस को काम करना, स्पीड को और ज्यादा तेज़ करना, इलेक्ट्रिसिटी बचत, दाम में कटौती करना और बड़े पैमाने पर डिवाइस कनेक्टिविटी का है।

उम्मीद है आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और आपको भी 5G टेक्नोलॉजी का भारत में लॉन्च होने का बेसब्री से इंतज़ार होगा। हर बार की तरह अगर आपको आर्टिकल पसंद आया हो तोह अपने फ्रेंड्स और फॅमिली के साथ शेयर जरूर करे और निचे कमेंट बॉक्स मई 5G को लेकर आपके क्या विचार है जरूर बताये।  


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